बच्चे किस प्रकार कि
शिक्षा को ग्रहण करते हैं और यह शिक्षा कहां से मिलती है हमें ये जाना लेना भी बहुत
जरूरी है तो आईए जानते है बच्चे कि शिक्षा कब
और कहां से शुरू होती है ?
जब बच्चे का जन्म
होता है तो पूरे घर के सदस्य बहुत खुश होते है और उसी दिन से ही क्या उस से पहले
से ही बच्चे को बड़े हो कर क्या बनना है तय कर देते है ये कुछ हद तक ठीक है लेकिन
कुछ दिन के बाद ये सब भूलकर उस बच्चे को किसी ओर दिशा में शिक्षा दी जाने लगती है इन्हीं को जानना है।
उसे बड़ों से कैसे
बात करनी है किस के साथ कैसा व्यवहार करना है इन सब बातों की तरफ पहले ध्यान दिया
जाना चाहिए हम सभी जानते है कि जब बच्चा बोलना शुरू करता है जोकि वह माँ शब्द को
सबसे पहले बोलता है क्योकि जीवन में जो पहला
गूरू होता है वह माँ ही होती है माँ का दायित्व होता है कि वह अपने बच्चे को अच्छी
से अच्छी शिक्षा दे और ऐसा करती भी है, लेकिन घर के कुछ सदस्य ऐसे भी होते हैं जो
खेल-खेल में बच्चे को कुछ ओर की सिखाते रहते हैं और यही वो उम्र होती है जब बच्चा
जो सिखता है वही उसके स्वभाव का कारण बनता है बच्चों से कहते है कि उसे ऐसा कह दो,
उसे गाली दे दो या उसे मार दो। इन सब चीजो को बच्चे को नहीं सिखाना चाहिए इस समय
बच्चे का दिमाग खुला हुआ रहता है उसे जो सिखाएगे उसके दिमाग में घर कर जाएगा।
हमेशा यही कोशिश करनी चाहिए कि बच्चे को सही बाते बताये, उसे बड़ों से कैसे बात
करनी है, उसे बड़ों का सम्मान कैसे करना है सबसे बड़ी बात वह हर चीज को जनाने की
कोशिश में रहता हैं उसे अच्छी व बूरी बातों में फर्क हमेशा बताते रहे। अच्छा करने
से उसका परिणाम क्या होता है और बूरा करने से क्या परिणाम होता है इस सभी का कोई
उदाहरण भी दे तो अच्छा रहेगा उसे जल्दी समझ आ जायेगा। बच्चा बड़ा हो कर उसी
प्रावर्ती का हो जाता है जैसा आप को करते
देखता है और जो आप उसे सिखाते हैं इसलिए जरूरी है कि बच्चे के समाने आप भी
अच्छे कार्यो को प्राथमिकता दे और बच्चे को हमेशा समझे कि वह चाहता क्या है यह भी
जरूरी है।
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